Yaadein

यादों को किसी ने यूँ छेड़ दिया

मेरा हिस्सा वो ऐसे बयां कर दिया

की छोड़ आया सदियों पहले जिसे

आज उसी का ज़िक्र कर दिया मुझसे

उसके बनने से जलने तक सफर

देखा है बहुत नज़दीकियों से

वो सुबह से एक शोरगुल सा दुकानों में

बिकता था तीर कमान आवाज गूंजती थी कानों में

मैंने देखी वो रौनक अपने अज़ीज़ रिश्तों में

अपने भाई की उन्न खिलती मुस्कुराहोटों में

वो नए से कुछ कपड़े मिलते थे जो एक एक सालों में

पकवान कुछ तीखें कुछ मीठे नज़रे भर जाती थी देख लेने से

अब कहाँ ये सब अब कहाँ ये सब बदले हुए नज़ारो में

झूठी शानो शौक़त अमीरेयत का दिखावा

अहंकार से डूबा हुआ उनका ये फ़साना

 भूल जाते हैं की खुशियां दौलत से कम 

साथ बिताए पलों में ज़्यादा मिलती है

और रावण तो हर साल जल जाता है

पर यादें उन्ही जगहों पे मिलती हैं

अब शायद समझ आता है कि क्यों बचपन याद आता है

जवानी तोह एक दिखावा है रिश्तों से दूर करता एक बहाना है

बचपन में चले जाते वापस तो कुछ हो पाता

अब तो उम्र गुज़र जाए उन्ही गलियारों में

तो ज़िन्दगी मुमकिन है

तेरे शहर में गुज़र जाए ज़िन्दगी

अब और मुमकिन नही

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