Raavan

वो हस्ता होगा देख इंसान की नादानियां जो जला देतें हैं उसे और खुद रोज़ जलते हैं रहते कभी गृणा की आग कभी घमंड की ज्वाला कभी क्रोध की माला जकड़ा हुआ मूर्ख इंसान समझता है रावण जला देने से जल गया सब मैल जो नही जला वो है उसके मस्तिष्क का बैर उलझ रहा …

Continue reading Raavan